Advanced International Journal for Research

E-ISSN: 3048-7641     Impact Factor: 9.11

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छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन और वन उपज पर इसका प्रभाव: एक इतिहासिक अध्ययन

Author(s) डॉ धमेन्द्र कुमार साह
Country India
Abstract किसी भी राष्ट्र के विकास को देखा जाए तो मुख्य रूप से प्राथमिक क्षेत्र, द्वितीय क्षेत्र एवं तृतीय क्षेत्र को माना जाता है। राष्ट्र को तीव्र विकास करना है तो ऐतिहासिक रूप से, वनोपज की उपलब्धता और गुणवत्ता सीधे तौर पर मानसून के पैटर्न पर निर्भर करती थी। हालाँकि, यह अध्ययन स्थापित करता है कि अत्यधिक तापमान और अनियमित वर्षा की घटनाओं (जैसे सूखे और बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति) के कारण यह निर्भरता अब विच्छेदित हो रही है।अध्ययन इंगित करता है कि औपनिवेशिक काल से लेकर आधुनिक समय तक की वन नीतियां मुख्य रूप से वनों के दोहन पर केंद्रित रही हैं, न कि जलवायु अनुकूलन। यह ऐतिहासिक अध्ययन भविष्य के लिए एक चेतावनी है। छत्तीसगढ़ को अपने अद्वितीय वन संसाधनों को बचाने के लिए विकास बनाम पर्यावरण के पुराने द्वंद्व को छोड़कर, जलवायु-अनुकूल वन प्रबंधन की दिशा में निर्णायक कदम उठाने होंगे ताकि वनोपज आधारित आजीविकाएँ सुरक्षित रह सकें। राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए श्जलवायु परिवर्तन पर छत्तीसगढ़ राज्य कार्य योजनाश् और श्जलवायु अनुकूल कृषि प्रशिक्षण कार्य क्रमशः जैसी पहलें शुरू की हैं। 2015 के पेरिस समझौते के आलोक में, राज्य ने जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन शमन को अपनी आर्थिक योजना में एकीकृत किया है, जिसमें वनों के आर्थिक और पर्यावरणीय मूल्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
Field Mathematics > Economy / Commerce
Published In Volume 7, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-21

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