Advanced International Journal for Research

E-ISSN: 3048-7641     Impact Factor: 9.11

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बोलचाल की हिंदी और मानक हिंदी के बीच अंतर क्या है, तथा इनका समाज और बच्चों के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Author(s) Ms. Aarti Rathod, Unnati Bhadoriya, Muskan Shaikh, Bhumi Agrawal, Takshraj Dabhi
Country India
Abstract भाषा मानव जीवन का एक महत्वपूण भाग है। भाषा केवल बोलने या लखने का माध्यम नह है, बल्क यह लोग को सोचने, संसार को समझने और अपने भाव व्यक्त करने म भी मदद करती है। बचपन से ही भाषा ब क सोच, सीखने क क्षमता और संवाद कौशल को आकार देती है। व्यक्त जन शब्द का प्रयोग करता है और जस प्रकार बोलता है, उसका प्रभाव उसके वचार , व्यवहार और समझ पर पड़ता है।
भाषा समाज और संस्कृत को भी गहराई से प्रभावत करती है। भाषा के माध्यम से ही लोग अपनी परंपराएँ, मूल्य और ान एक-दूसरे तक पँचाते ह।
अलग-अलग पर तय म भाषा के अलग-अलग रूप का प्रयोग कया जाता है। औपचारक भाषा का उपयोग वालय , पुस्तक और सरकारी काय म होता है, जबक अनौपचारक भाषा का प्रयोग परवार और म के साथ दैनक बातचीत म कया जाता है। दोन ही प्रकार क भाषा महत्वपूण ह क्य क वे अलग-अलग प्रकार के संवाद म सहायता करती ह। भाषा का प्रभाव केवल ब तक ही सीमत नह है, बल्क वयस्क पर भी पड़ता है। व्यक्त जस प्रकार क भाषा का प्रयोग करता है, वह उसक सोच और अपने वचार को व्यक्त करने क क्षमता को प्रभावत करती है। ब के लए भाषा वशेष रूप से महत्वपूण है, क्य क यह उनक शब्दावली, सोचने क शक्त और आत्मवास के वकास म सहायक होती है। घर, वालय और समाज म ब को जस प्रकार क भाषा सुनने को मलती है, वह उनके सीखने और वकास म महत्वपूण भूमका नभाती है। अधकांश भाषाओं के एक से अधक रूप होते ह। सामान्यतः एक सरल और दैनक जीवन म प्रयुक्त होने वाला रूप होता है तथा दूसरा औपचारक और शुद्ध रूप होता है। यह अंतर भाषा को वभन्न पर तय के अनुसार ढलने म मदद करता है। हद भाषा म भी यह अंतर स्पष्ट रूप से दखाई देता है। बोलचाल क हद का प्रयोग दैनक जीवन म कया जाता है, जबक मानक (शुद्ध) हद का प्रयोग शक्षा, साहत्य और सरकारी काय म होता है। यह इन मुख्य बात पर आधारत है:
बोलचाल क हद और कताब क हद अलग-अलग होती ह। इनका फक लोग क बात-चीत और संस्कृत पर असर डालता है। दोन तरह क हद सुनने और सीखने से ब क भाषा, सोच और पढ़ाई पर प्रभाव पड़ता है।
यह चत्र भारत क भाषाई ववधता को दशाता है। इसम अलग-अलग भाषाएँ और उनक कई बोलयाँ एक वृत्त के रूप म दखाई गई ह। यह हम दखाता है क भारत एक ऐसा देश है जहाँ बहुत सारी भाषाएँ और बोलने के तरीके मौजूद ह। हर राज्य, हर ेत्र, और यहाँ तक क एक ही राज्य के अलग-अलग हस्स म भी भाषा का रूप बदल जाता है। इस ववधता का ब पर सीधा प्रभाव है। बे सबसे पहले वही भाषा सीखते ह जो वे अपने घर और आसपास के लोग से सुनते ह। यह भाषा आमतौर पर बोलचाल क होती है, जो सरल और रोज़मरा म इस्तेमाल क जाती है। इसलए बे बोलचाल क हद को जल्द समझ लेते ह और उसे आसानी से बोल भी
पाते ह।
Field Sociology > Linguistic / Literature
Published In Volume 7, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-04-05

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