Advanced International Journal for Research
E-ISSN: 3048-7641
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Volume 7 Issue 2
March-April 2026
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बोलचाल की हिंदी और मानक हिंदी के बीच अंतर क्या है, तथा इनका समाज और बच्चों के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है?
| Author(s) | Ms. Aarti Rathod, Unnati Bhadoriya, Muskan Shaikh, Bhumi Agrawal, Takshraj Dabhi |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | भाषा मानव जीवन का एक महत्वपूण भाग है। भाषा केवल बोलने या लखने का माध्यम नह है, बल्क यह लोग को सोचने, संसार को समझने और अपने भाव व्यक्त करने म भी मदद करती है। बचपन से ही भाषा ब क सोच, सीखने क क्षमता और संवाद कौशल को आकार देती है। व्यक्त जन शब्द का प्रयोग करता है और जस प्रकार बोलता है, उसका प्रभाव उसके वचार , व्यवहार और समझ पर पड़ता है। भाषा समाज और संस्कृत को भी गहराई से प्रभावत करती है। भाषा के माध्यम से ही लोग अपनी परंपराएँ, मूल्य और ान एक-दूसरे तक पँचाते ह। अलग-अलग पर तय म भाषा के अलग-अलग रूप का प्रयोग कया जाता है। औपचारक भाषा का उपयोग वालय , पुस्तक और सरकारी काय म होता है, जबक अनौपचारक भाषा का प्रयोग परवार और म के साथ दैनक बातचीत म कया जाता है। दोन ही प्रकार क भाषा महत्वपूण ह क्य क वे अलग-अलग प्रकार के संवाद म सहायता करती ह। भाषा का प्रभाव केवल ब तक ही सीमत नह है, बल्क वयस्क पर भी पड़ता है। व्यक्त जस प्रकार क भाषा का प्रयोग करता है, वह उसक सोच और अपने वचार को व्यक्त करने क क्षमता को प्रभावत करती है। ब के लए भाषा वशेष रूप से महत्वपूण है, क्य क यह उनक शब्दावली, सोचने क शक्त और आत्मवास के वकास म सहायक होती है। घर, वालय और समाज म ब को जस प्रकार क भाषा सुनने को मलती है, वह उनके सीखने और वकास म महत्वपूण भूमका नभाती है। अधकांश भाषाओं के एक से अधक रूप होते ह। सामान्यतः एक सरल और दैनक जीवन म प्रयुक्त होने वाला रूप होता है तथा दूसरा औपचारक और शुद्ध रूप होता है। यह अंतर भाषा को वभन्न पर तय के अनुसार ढलने म मदद करता है। हद भाषा म भी यह अंतर स्पष्ट रूप से दखाई देता है। बोलचाल क हद का प्रयोग दैनक जीवन म कया जाता है, जबक मानक (शुद्ध) हद का प्रयोग शक्षा, साहत्य और सरकारी काय म होता है। यह इन मुख्य बात पर आधारत है: बोलचाल क हद और कताब क हद अलग-अलग होती ह। इनका फक लोग क बात-चीत और संस्कृत पर असर डालता है। दोन तरह क हद सुनने और सीखने से ब क भाषा, सोच और पढ़ाई पर प्रभाव पड़ता है। यह चत्र भारत क भाषाई ववधता को दशाता है। इसम अलग-अलग भाषाएँ और उनक कई बोलयाँ एक वृत्त के रूप म दखाई गई ह। यह हम दखाता है क भारत एक ऐसा देश है जहाँ बहुत सारी भाषाएँ और बोलने के तरीके मौजूद ह। हर राज्य, हर ेत्र, और यहाँ तक क एक ही राज्य के अलग-अलग हस्स म भी भाषा का रूप बदल जाता है। इस ववधता का ब पर सीधा प्रभाव है। बे सबसे पहले वही भाषा सीखते ह जो वे अपने घर और आसपास के लोग से सुनते ह। यह भाषा आमतौर पर बोलचाल क होती है, जो सरल और रोज़मरा म इस्तेमाल क जाती है। इसलए बे बोलचाल क हद को जल्द समझ लेते ह और उसे आसानी से बोल भी पाते ह। |
| Field | Sociology > Linguistic / Literature |
| Published In | Volume 7, Issue 2, March-April 2026 |
| Published On | 2026-04-05 |
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E-ISSN 3048-7641
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10.63363/aijfr
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