Advanced International Journal for Research

E-ISSN: 3048-7641   •   Impact Factor: 9.11

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आधुनिक हिन्दी साहित्य में समाज का प्रतिबिम्ब

Author(s) डॉ. बलप्रदा श्रीवास्तव
Country India
Abstract आधुनिक हिन्दी साहित्य अपने युगीन समाज का सशक्त, यथार्थवादी तथा संवेदनशील प्रतिबिम्ब प्रस्तुत करता है। यह साहित्य केवल कलात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित न रहकर सामाजिक संरचना, मानवीय संबंधों, वर्ग-संघर्ष, आर्थिक विषमता, जाति-व्यवस्था, नारी की सामाजिक स्थिति, राजनीतिक चेतना तथा सांस्कृतिक परिवर्तनों को गहनता के साथ अभिव्यक्त करता है। औपनिवेशिक काल, स्वतंत्रता आंदोलन तथा स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् उत्पन्न सामाजिक परिस्थितियों ने आधुनिक हिन्दी साहित्य को गहराई से प्रभावित किया है।
आधुनिक साहित्यकारों ने समाज में व्याप्त अन्याय, शोषण, असमानता और विसंगतियों को यथार्थवादी दृष्टि से प्रस्तुत करते हुए आम जनजीवन की पीड़ा, संघर्ष और आकांक्षाओं को स्वर दिया है। प्रेमचंद से लेकर मुक्तिबोध, नागार्जुन, अज्ञेय, भीष्म साहनी और समकालीन रचनाकारों तक, साहित्य में सामाजिक चेतना का निरंतर विकास दिखाई देता है। इस साहित्य में नारी-विमर्श, दलित-विमर्श, किसान और मजदूर जीवन, ग्रामीण-शहरी द्वंद्व तथा राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव जैसे विषय विशेष रूप से उभरकर सामने आते हैं।
Published In Volume 7, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-04-08

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