Advanced International Journal for Research

E-ISSN: 3048-7641     Impact Factor: 9.11

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कौटिल्य के राजदर्शन की आधुनिक राजनीति में प्रासंगिकता

Author(s) Dr. Pushpendar Singh gupta
Country India
Abstract भारतीय राजनीतिक चिंतन की परंपरा में आचार्य कौटिल्य का नाम अत्यंत सम्मान और गंभीरता के साथ लिया जाता है। उनका ग्रंथ अर्थशास्त्र न केवल प्राचीन भारत की राजनीतिक] आर्थिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का दर्पण है] बल्कि आधुनिक राजनीति और शासन प्रणाली के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध होता है। कौटिल्य ने राज्य को केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं माना, बल्कि उसे जनकल्याण] सुरक्षा] न्याय और आर्थिक समृद्धि का केंद्र बताया। उनके द्वारा प्रतिपादित राजधर्म] कूटनीति] गुप्तचर व्यवस्था] विदेश नीति तथा प्रशासनिक नियंत्रण जैसे सिद्धांत आज भी आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में प्रासंगिक दिखाई देते हैं।
वर्तमान वैश्विक राजनीति में जहाँ राष्ट्र सुरक्षा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा, आतंकवाद, भ्रष्टाचार तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिलताएँ बढ़ रही हैं, वहाँ कौटिल्य का यथार्थवादी राजनीतिक दृष्टिकोण नई दिशा प्रदान करता है। उनका मंडल सिद्धांत आधुनिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शक्ति संतुलन की अवधारणा से मेल खाता है। इसी प्रकार उनकी आर्थिक नीतियाँ आज के सुशासन, कर व्यवस्था और लोककल्याणकारी राज्य की अवधारणाओं को भी प्रभावित करती हैं।
यह शोध आलेख कौटिल्य के राजदर्शन के प्रमुख सिद्धांतों का विश्लेषण करते हुए आधुनिक राजनीति में उनकी प्रासंगिकता का अध्ययन करता है। साथ ही यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन आज भी समकालीन राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए कितना उपयोगी और व्यवहारिक है।
Keywords कौटिल्य, अर्थशास्त्र, राजदर्शन, आधुनिक राजनीति, कूटनीति, सुशासन, राज्य व्यवस्था
Field Sociology > Politics
Published In Volume 7, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-15

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