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E-ISSN: 3048-7641   •   Impact Factor: 9.11

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कृत्रिम बुद्धिमता मानव सभ्यता के लिए वरदान या अभिशाप।

Author(s) Dr. रीना नाज़िरभाई वहोरा
Country India
Abstract कृत्रिम बुद्धिमता एक ऐसा आविष्कार है, जो की प्रौधौगिकी की परिभाषा को पूर्ण करता है क्यूंकि मानव ने स्वयं अपने जैसी रचना रोबोट्स के रूप में कृत्रिम बुद्धिमता के जरिये कर दी है। कृत्रिम बुद्धिमता मानव के परिकल्पना से कई गुना आगे है और यह भविष्य में एक अलग दुनिया की स्थापना करने वाला है, जहाँ मानव और मशीन के बिच एक सम्बन्ध स्थापित हो जायेगा क्यूंकि मानव इस हद तक कृत्रिम बुद्धिमता पर अपनी निर्भरता बना चूका है और आने वाले समय में यह निर्भरता इतनी बढ़ चुकी होगी की बिना कृत्रिम बुद्धि के मानव जीवन असंभव सा प्रतीत होगा। भविष्य में सामाजिक जीवन पर कृत्रिम बुद्धिमता का महत्व इतना अधिक बढ़ जायेगा की कहीं-न-कहीं मानव के लिए यह उपयोगी के साथ-साथ खतरा भी बन जायेगा, जो की प्राकृतिक रूप से भी मानव सभ्यता के प्रतिकूल होगा। इसलिए, आज हम चर्चा करेंगे की क्या “कृत्रिम बुद्धिमता मानव सभ्यता के लिए वरदान या अभिशाप ” है।
Keywords कृत्रिम बुद्धिमता, मानव सभ्यता
Field Sociology > Education
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-10-01

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