Advanced International Journal for Research

E-ISSN: 3048-7641     Impact Factor: 9.11

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राजनीतिक चेतना से सामाजिक जागरण तक : गाँधी का आंदोलनात्मक दृष्टिकोण

Author(s) Ms. Sakshi Tiwari
Country India
Abstract ईश्वर ने प्रत्येक मनुष्य का निर्माण समान संरचना के आधार पर किया है| प्रत्येक मनुष्य अपने संपूर्ण जीवन काल में इस संरचना का प्रयोग व्यक्तिगत रूप से विभिन्न प्रकार के संदर्भ में करता है परंतु जो मनुष्य इस संरचना का प्रयोग व्यक्तिगत रूप से हटकर समाज के विभिन्न संदर्भों के लिए करता है वही हमारा राष्ट्रपिता बनता है। गांधी जी ने अपने व्यक्तिगत विचारों के माध्यम से समाज में प्रचलित नकारात्मक गतिविधियों के खिलाफ सामाजिक आंदोलन की नींव रखी तथा सर्वोदय जैसे सिद्धांतों के माध्यम से गांधी जी ने समाज के विकास में अत्यधिक जोर दिया। कोई भी नेता सामाजिक आंदोलन तथा राजनीतिक आंदोलन को अपने उद्देश्यों में तभी सफल कर पाते हैं जब वह समाज को संपूर्ण रूप से पढ़ पाते हैं तथा समझ पाते हैं |निसंदेह गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत वापसी तक समाज तथा समाज के हर वर्ग के सदस्यों को समझने में अपना योगदान दिया तत्पश्चात सामाजिक आंदोलन में भाग लेकर समाज की तथा समाज के सदस्यों की मांगों को पूरा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शोध पत्र व्याख्यित करेगा कि गांधी जी के राजनीतिक तथा आदर्शवादी जीवन का विकास कैसे हुआ तथा अपनी आदर्शवादी नीतियों का प्रयोग करके किस तरह से गांधी जी ने राजनीतिक तथा सामाजिक आंदोलन में सफलता पाकर अपने आगमन के पश्चात सम्पूर्ण भारत के परिदृश्य को सकारात्मक रूप में बदल कर रख दिया।
Keywords सम्प्रभुता ,आदर्शवादी ,आध्यात्मिकता ,निष्क्रिय प्रतिरोध ,संघवाद ,सर्वोदय
Field Sociology
Published In Volume 7, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-02-22

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