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E-ISSN: 3048-7641     Impact Factor: 9.11

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“बस्तर जिले में मुरिया जनजाति के संदर्भ में सतत कृषि, ग्रामीण विकास एवं कौशल विकास का समन्वित प्रभाव: सतत आजीविका पर एक अनुभवजन्य अध्ययन”

Author(s) Mr. प्रेमजीत निराला, Dr. देवाशीष हालदार
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य बस्तर जिले में निवासरत मुरिया जनजाति के संदर्भ में सतत कृषि, ग्रामीण विकास एवं कौशल विकास के परस्पर संबंधों का विश्लेषण करना है तथा यह समझना है कि ये घटक किस प्रकार समुदाय की आजीविका सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करते हैं। अध्ययन प्राथमिक आँकड़ों पर आधारित है, जो क्षेत्रीय सर्वेक्षण के माध्यम से संकलित किए गए हैं। शोध में उत्तरदाताओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, कृषि पर निर्भरता, परम्परागत कौशलों की प्रकृति, आय की नियमितता, प्रशिक्षण की उपलब्धता, बाजार तक पहुँच एवं प्रमुख समस्याओं का विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि मुरिया जनजाति की आजीविका का मुख्य आधार कृषि है, किंतु यह कृषि परंपरागत, कम उत्पादकता वाली और मौसम पर अत्यधिक निर्भर है। साथ ही, बाँस शिल्प, काष्ठ शिल्प एवं अन्य पारम्परिक कौशल अभी भी समुदाय में विद्यमान हैं, परंतु उनसे प्राप्त आय अनियमित एवं सीमित है। कच्चे माल की कमी, बाजार मूल्य की समस्या, प्रभावी प्रशिक्षण का अभाव तथा संस्थागत सहयोग की कमी इन कौशलों को सतत आजीविका के रूप में विकसित होने से रोकती है।
शोध यह तर्क प्रस्तुत करता है कि यदि सतत कृषि पद्धतियों (जैसे बहुफसली खेती, स्थानीय बीजों का संरक्षण, जैविक कृषि) को कौशल विकास एवं ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ा जाए, तो मुरिया जनजाति के लिए आजीविका के विविध एवं स्थायी स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। यह अध्ययन नीति-निर्माताओं और विकास संगठनों के लिए यह संकेत प्रदान करता है कि एकीकृत दृष्टिकोण के बिना जनजातीय क्षेत्रों में दीर्घकालिक ग्रामीण विकास संभव नहीं है।
Keywords मुरिया जनजाति; सतत आजीविका; सतत कृषि; कौशल विकास; ग्रामीण विकास; बस्तर
Field Sociology > Economics
Published In Volume 7, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-12

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