Advanced International Journal for Research

E-ISSN: 3048-7641     Impact Factor: 9.11

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दिल्ली N.C.R. में बाल अपराध की प्रवृत्ति, कारण एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य: शालीमार गार्डन क्षेत्र के विशेष संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author(s) Rohit Kumar, Dr. Shyam Lal
Country India
Abstract बाल अपराध एक ऐसी अमानवीय घटना है जो समाज के लिए बड़ी घातक है क्योंकि सभ्य समाज का निर्माण सभ्य लोग ही करते है और सभ्य लोग तभी समाज में होंगे जब समाज में पल रहे बच्चों को सभ्य परवरिश दी जाएगी | समाज कोई व्यक्ति नहीं है की उसको आप सुधार सकते हो बल्कि समाज एक लोगों का स्वरूप है जिसका कोई चेहरा नहीं होता है आज के समय में बाल अपराध की परेशानी उन बड़ी परेशानियों में से एक है जिससे समाज की आए दिन छवि खराब हो रही है और यह समस्या की एक समुदाय की नहीं बल्कि पूरे समाज की है | और लगभग सभी देशों में बाल अपराध की घटना बढ़ रही है जो एक चिंता का विषय है | चिंता का विषय बताना इस लिए उचित है क्योंकि किसी भी देश का भविष्य उसके बालक ही होते है | भारत में बाल अपराध को किशोर अपराध भी कहते है और इसको भारत में अलग अलग रूपों में वर्गीकरत किया गया है मनोवेगयानिकों का कहना है की कोई भी बालक जन्मजात अपराधी नहीं होता है बल्कि उसको परिस्थिति ऐसी मिलती है की वह अपराध की दुनिया में जाने अनजाने में कदम रखता है
Field Sociology > Administration / Law / Management
Published In Volume 7, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-23

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