Advanced International Journal for Research

E-ISSN: 3048-7641     Impact Factor: 9.11

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अवसाद की गहरी खाई में डूबता आधुनिक समाज

Author(s) Dr. Sweta Bala
Country India
Abstract प्रस्तुत लेख समकालीन भारतीय समाज में बढ़ती आत्महत्या, अवसाद एवं मानसिक तनाव की समस्या का बहुआयामी विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन इस धारणा को चुनौती देता है कि अवसाद केवल व्यक्तिगत अथवा मनोवैज्ञानिक समस्या है, और इसके स्थान पर यह तर्क स्थापित करता है कि इसकी जड़ें आधुनिक पूँजीवादी व्यवस्था, तीव्र प्रतिस्पर्धा, शैक्षिक दबाव, बेरोज़गारी, गिग अर्थव्यवस्था, कृषि संकट, सामाजिक विखंडन तथा पारिवारिक संबंधों के क्षरण जैसी संरचनात्मक समस्याओं में निहित हैं। लेख में नोएडा, कोटा, NEET परीक्षा से संबंधित घटनाओं, छात्रों तथा किसानों की आत्महत्याओं और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि आधुनिक विकास मॉडल ने आर्थिक असमानता, सामाजिक अलगाव और मानसिक असुरक्षा को बढ़ावा दिया है। साथ ही, यह लेख कृषि-आधारित पारंपरिक समाज और वर्तमान उपभोक्तावादी संस्कृति के तुलनात्मक अध्ययन द्वारा यह प्रतिपादित करता है कि समुदाय, प्रकृति और परिवार से बढ़ती दूरी मानसिक स्वास्थ्य संकट को और गहरा कर रही है। अंततः यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि आत्महत्या और अवसाद की समस्या का समाधान केवल चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेपों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक, आर्थिक और नीतिगत स्तर पर व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन आवश्यक हैं।
Keywords अवसाद, आत्महत्या, मानसिक स्वास्थ्य, पूँजीवाद, प्रतिस्पर्धा, बेरोज़गारी, गिग अर्थव्यवस्था, कृषि संकट, सामाजिक विखंडन, युवा पीढ़ी।
Field Sociology > Philosophy / Psychology / Religion
Published In Volume 7, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-06-22
DOI https://doi.org/10.63363/aijfr.2026.v07i03.6529

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